सनातन धर्म सिर्फ एक धर्म नहीं है, यह एक अनादि और अनंत जीवन प्रणाली है। दुनिया में कई सभ्यताएँ आईं और खत्म हो गईं, लेकिन सनातन धर्म आज भी जीवित है और आगे भी रहेगा।
तो आखिर सनातन धर्म की शुरुआत कब हुई?
और क्या यह कभी समाप्त होगा?
चलिए जानते हैं।
सनातन धर्म कब शुरू हुआ?
सनातन धर्म की एक विशेषता यह है कि यह किसी एक व्यक्ति, ग्रंथ या वर्ष से जुड़ा हुआ धर्म नहीं है।
यह ब्रह्मांड की शुरुआत के साथ ही उत्पन्न हुआ माना गया है।
क्यों कहा जाता है कि सनातन “अनादि” है?
- वेदों के अनुसार ब्रह्मांड का निर्माण होते ही ऋषियों को ज्ञान का प्रकाश प्राप्त हुआ और उसी से वेद प्रकट हुए।
- वेदों का ज्ञान किसी मनुष्य द्वारा “लिखा हुआ” नहीं है—यह “श्रुति” है, जो ऋषियों ने सुना और आगे बढ़ाया।
- इसलिए सनातन धर्म की कोई शुरुआत की तारीख नहीं है।
👉 सरल शब्दों में:
ब्रह्मांड की रचना = सनातन धर्म की शुरुआत।

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सनातन धर्म कब समाप्त होगा?
कभी नहीं। इसका कारण:
1️⃣ सनातन एक जीवन शैली है
यह सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है—
योग, ध्यान, आयुर्वेद, प्रकृति, कर्म, धर्म, ज्ञान, सत्य…
यह चीजें कभी समाप्त नहीं होतीं।
2️⃣ सनातन प्राकृतिक नियमों पर आधारित है
जैसे—
- सूर्य उगना
- पृथ्वी घूमना
- ऋतुएँ बदलना
ये सब जैसे अनंत हैं, वैसे ही सनातन भी।
3️⃣ कई बार सभ्यता बदली, लेकिन सनातन जीवित रहा
महाभारत, मुगल, ब्रिटिश—
सब बदले, लेकिन सनातन की जड़ें आज भी उतनी ही मजबूत हैं।
4️⃣ सनातन धर्म “समाप्त होने वाला” धर्म नहीं—
बल्कि समय के साथ खुद को अपडेट करने वाला धर्म है।
👉 इसलिए कहते हैं:
“सनातन न कभी शुरू हुआ, न कभी समाप्त होगा—यह सदैव था, सदैव है और सदैव रहेगा।”
🌼 निष्कर्ष
सनातन धर्म ब्रह्मांड जितना पुराना और सत्य जितना स्थायी है।
इसकी कोई शुरुआत नहीं, कोई अंत नहीं।
यह जीवन, प्रकृति और सत्य के नियमों पर आधारित एक शाश्वत मार्ग है—
जो हमेशा मानवता को प्रकाश देता रहेगा।
