सनातन कब शुरू हुआ और कब समाप्त होगा? “When did Sanatan begin and when will it end?”

सनातन क्या है? जो न कभी शुरू हुआ, न कभी खत्म होगा; जो हमेशा से है और हमेशा रहेगा।

सनातन धर्म कोई ऐसी परंपरा नहीं है जिसकी शुरुआत किसी एक तारीख़, किसी एक ग्रंथ या किसी एक व्यक्ति से हुई हो। “सनातन” शब्द ही अपने आप में इसका मूल बताता है—जो सदैव था, सदैव है और सदैव रहेगा। यह धर्म ब्रह्मांड की उसी प्राचीन धड़कन की तरह है जो सृष्टि के आरंभ से ही चल रही है।

हजारों साल पहले, जब लिखने-पढ़ने की व्यवस्था भी नहीं थी, तब भी मनुष्य प्रकृति, तत्व, ऋषियों के ज्ञान और जीवन के नियमों को समझकर जी रहा था। यही समझ आगे चलकर वेदों, उपनिषदों, पुराणों और ऋषियों की परंपरा में रूपांतरित हुई। इसलिए सनातन धर्म का जन्म किसी “दिन” पर नहीं—यह सृष्टि के साथ ही उत्पन्न हुआ

और क्या यह कभी खत्म होगा?
धर्म बदलने वाली चीज़ नहीं है, यह जीवन जीने की पद्धति है। जब तक मानवता, प्रकृति, सत्य, करुणा, कर्म, धर्म और ज्ञान का अस्तित्व है, तब तक सनातन धर्म भी रहेगा। यह किसी युग या सीमा में बंधा नहीं—यह अनंत है।

सनातन धर्म का असली सौंदर्य यही है कि यह खुद को बदलती पीढ़ियों, विज्ञान, समाज और समय के साथ ढाल लेता है, लेकिन अपना मूल सिद्धांत—सत्य—कभी नहीं छोड़ता।

इसीलिए सनातन धर्म की शुरुआत अनादि है और इसका अंत अनंत।

पाठकों के लिए कुछ सवाल:
1️⃣ आपके अनुसार सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता क्या है, और क्या आप इसे सच में अनादि–अनंत मानते हैं?
2️⃣ सनातन धर्म का कौन सा सिद्धांत आपको सबसे अधिक प्रेरित करता है, और क्या आपको लगता है कि समय के साथ इसमें बदलाव आया है?
3️⃣ आज की युवा पीढ़ी सनातन धर्म को कैसे समझती है—क्या विज्ञान और सनातन धर्म एक-दूसरे के पूरक हैं?
4️⃣ आपके अनुसार इसका सबसे महत्वपूर्ण आधार क्या है—वेद, उपनिषद, पुराण या कर्म? क्या यह सिर्फ धर्म है या जीवन जीने का तरीका?
5️⃣ अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएं—आपके विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि कोई सवाल हो तो पूछें, अपना अनुभव साझा करें और अगर यह लेख पसंद आया हो, तो इसे दूसरों तक पहुँचाएं।

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